गांधीजी के प्रिय भजन
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वैष्णव जन तो तेने कहिये, पर दृखे
उपकार करे तोये, सकल लोकमां
सहुने वंदे, वाच काछ मन
निश्चल राखे, समदृष्टी
ने तृष्णा त्यागी, जिहृवा थकी
असत्य न बोले, मोह माया
व्यापे नहि जेने, रामनाम शुं
ताली लागी, वणलोभी ने
कपटरहित छे, कुळ एकोतेर तार्या रे।। |