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आगाखाँ महल


आगाखाँ महल

 

महाराष्ट्र राज्य के पुने शहर में स्थित आगाखाँ महल एक महान ऐतिहासिक धरोहर है। सन् 1972 में प्रिंस आगाखाँ ने यह महल गांधी स्मारक समिति का दान कर दिया। तब से उद्याम एवं उपवन संगठन इस ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख कर रहा है।


ऐतिहासिक महत्त्व :-

सन् 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन` के दौरान अंग्रेज सरकार ने इस महल में महात्मा गांधी, कस्तूरबा, महादेवभाई देसाई, डज्ञॅ. सरोजिनी नायडू तथा अन्य स्वाधीनता सेनानियों को कैद कर रखा था। कस्तूरबा औश्र महादेव देसाई ने इस महल में कैद के दौरान अपनी आखिरी सांसे ली।


प्रमुख आकर्षण :-

19 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले हुए इस भव्य महल की शोभा ही न्यारी है। महल की बाहरी दीवारों पर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की तस्वीरें लगाई गयी है। इस महल में गांधी और कस्तूरबा द्वारा इस्तेमाल की गयी चीजें जैसे उनके बिस्तर, लिखने की मेज, कस्तूरबा की साड़ी तथा अन्य कपड़े, उनकी चप्पलें आदि संरक्षित है। महात्मा गांधी की विलक्षणता को अभिव्यक्त करती उनकी एक प्रतिमा भी यहाँ स्थापित की गयी है। सही अर्थों में गांधीवादी आदर्शों का पालन करते हुए यहाँ खादी ग्रामोद्योग भंडार, महादेव छापखाना, राष्ट्रीय महिला संस्था, सिलाई-कक्षाएँ आदि चलाए जाते हैं।


कब आएं :-

राष्ट्रीय छुट्टियों के अलावा यह महल सभी कार्य दिवसों में खुला रहता है।


यात्रा का सर्वोत्तम समय :-

अक्तूबर से मार्च


यहाँ कैसे पहुँचे :-

मुंबई से मात्र 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुने शहर तक पहुँचने के लिए ढेर सारी सेवाएँ उपलब्ध है। महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बसों के अलावा प्राइवेट बसों की भी बेहतरीन सेवाएं उपलब्ध हैं। पुने शहर में रिक्शा और टैक्सी आसानी से उपलब्ध है।


अतिरिक्त जानकारी के लिए संपर्क करें :-

1. http://www.gandhibapu.com/photo/agakhan.html

2. http://www.punediary.com/aga_khan_palaceinfo.htm


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