सुविचार
( गांधीजी के शब्दों में )

 


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अहिंसा एक विज्ञान है। विज्ञान के शब्दकोश में 'असफलता' का कोई स्थान नहीं।

महात्मा, भाग 5 के पृष्ठ 81


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उस आस्था का कोई मूल्य नहीं जिसे आचरण में न लाया जा सके ।

महात्मा, भाग 5 के पृष्ठ 180


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सार्थक कला रचनाकार की प्रसन्नता, समाधान और पवित्रता की गवाह होती है ।

 महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 56


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एक सच्चे कलाकार के लिए सिर्फ वही चेहरा सुंदर होता है जो बाहरी दिखावे से परे, आत्मा की सुंदरता से चमकता है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 159


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मनुष्य अक्सर सत्य का सौंदर्य देखने में असफल रहता है, सामान्य व्यक्ति इससे दूर भागता है और इसमें निहित सौंदर्य के प्रति अंधा बना रहता है।

महात्मा, भाग 5 के पृष्ठ 180 


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चरित्र और शैक्षणिक सुविधाएँ ही वह पूँजी है जो मातापिता अपने संतान में समान रूप से स्थानांतरित कर सकते हैं।

 महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 367


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विश्व के सारे महान धर्म मानवजाति की समानता, भाईचारे और सहिष्णुता का संदेश देते हैं।

 महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 257


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अधिकारों की प्राप्ति का मूल स्रोत कर्तव्य है |

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 367


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सच्ची अहिंसा मृत्युशैया पर भी मुस्कराती रहेगी। 'अहिंसा' ही वह एकमात्र शक्ति है जिससे हम शत्रु को अपना मित्र बना सकते हैं और उसके प्रेमपात्र बन सकते हैं |

महात्मा, भाग  5 के पृष्ठ 243


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अधभूखे राष्ट्र के पास न कोई धर्म, न कोई कला और न ही कोई संगठन हो सकता है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 251


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निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी।

महात्मा, भाग 4 के पृष्ठ 252


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  आत्मरक्षा हेतु मारने की शक्ति से बढ़कर मरने की हिम्मत होनी चाहिए।

 महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 3


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जब भी मैं सूर्यास्त की अद्भुत लालिमा और चंद्रमा के सौंदर्य को निहारता हूँ तो मेरा हृदय सृजनकर्ता के प्रति श्रद्धा से भर उठता है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 302


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वीरतापूर्वक सम्मान के साथ मरने की कला के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। उसके लिए परमात्मा में जीवंत श्रद्धा काफी है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 302


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क्रूरता का उत्तर क्रूरता से देने का अर्थ अपने नैतिक व बौद्धिक पतन को स्वीकार करना है।

महात्मा, भाग 7 के पृष्ठ 399


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एकमात्र वस्तु जो हमें पशु से भिन्न करती है वह है सही और गलत के मध्य भेद करने की क्षमता जो हम सभी में समान रूप से विद्यमान है।

 महात्मा, भाग 4 के पृष्ठ 158


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आपकी समस्त विद्वत्ता, आपका शेक्सपियर और वर्ड्सवर्थ का संपूर्ण अध्ययन निरर्थक है यदि आप अपने चरित्र का निर्माण व विचारों क्रियाओं में सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते।

 महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 376


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वक्ता के विकास और चरित्र का वास्तविक प्रतिबिंब 'भाषा' है।

एविल रोट बाइ द इंग्लिश मिडीयम, 1958 पृष्ठ 18


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स्वच्छता, पवित्रता और आत्मगसम्मान से जीने के लिए धन की आवश्यकता नहीं होती।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 356


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निर्मल चरित्र एवं आत्मिक पवित्रता वाला व्यक्तित्व सहजता से लोगों का विश्वास अर्जित करता है और स्वतः अपने आस पास के वातावरण को शुद्ध कर देता है।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 57


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जीवन में स्थिरता, शांति और विश्वसनीयता की स्थापना का एकमात्र साधन भक्ति है।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 43


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सुखद जीवन का भेद त्याग पर आधारित है। त्याग ही जीवन है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 192


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अधिकार-प्राप्ति का उचित माध्यम कर्तव्यों का निर्वाह है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 179


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उफनते तूफान को मात देना है तो अधिक जोखिम उठाते हुए हमें पूरी शक्ति के साथ आगे बढना होगा।

 महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 286


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रोम का पतन उसका विनाश होने से बहुत पहले ही हो चुका था।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 349


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गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती। वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 72


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जहां तक मेरी दृष्टि जाती है मैं देखता हूं कि परमाणु शक्ति ने सदियों से मानवता को संजोये रखने वाली कोमल भावना को नष्ट कर दिया है।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 , पृष्ठ 1


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मेरे विचारानुसार गीता का उद्देश्य आत्म-ज्ञान की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग बताना है।

द मैसेज ऑफ द गीता, 1959, पृष्ठ 4


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गीता में उल्लिखित भक्ति, कर्म और प्रेम के मार्ग में मानव द्वारा मानव के तिरस्कार के लिए कोई स्थान नहीं है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 278


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मैं यह अनुभव करता हूं कि गीता हमें यह सिखाती है कि हम जिसका पालन अपने दैनिक जीवन में नहीं करते हैं, उसे धर्म नहीं कहा जा सकता है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 311


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हजारों लोगों द्वारा कुछ सैकडों की हत्या करना बहादुरी नहीं है। यह कायरता से भी बदतर है। यह किसी भी राष्ट्रवाद और धर्म के विरुद्ध है।

महात्मा, भाग 7 के पृष्ठ 252


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साहस कोई शारीरिक विशेषता न होकर आत्मिक विशेषता है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 61


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संपूर्ण विश्व का इतिहास उन व्यक्तियों के उदाहरणों से भरा पडा है जो अपने आत्म-विश्वास, साहस तथा दृढता की शक्ति से नेतृत्व के शिखर पर पहुंचे हैं।

महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 23


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हृदय में क्रोध, लालसा व इसी तरह की .....भावनाओं को रखना, सच्ची अस्पृश्यता है।

महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 230


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मेरी अस्पृश्यता के विरोध की लडाई, मानवता में छिपी अशुद्धता से लडाई है।

महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 168


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सच्चा व्यक्तित्व अकेले ही सत्य तक पहुंच सकता है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 248


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शांति का मार्ग ही सत्य का मार्ग है। शांति की अपेक्षा सत्य अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 153


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हमारा जीवन सत्य का एक लंबा अनुसंधान है और इसकी पूर्णता के लिए आत्मा की शांति आवश्यक है।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 61


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यदि समाजवाद का अर्थ शत्रु के प्रति मित्रता का भाव रखना है तो मुझे एक सच्चा समाजवादी समझा जाना चाहिए।

महात्मा, भाग 8 के पृष्ठ 37


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आत्मा की शक्ति संपूर्ण विश्व के हथियारों को परास्त करने की क्षमता रखती है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 121


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किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए सोने की बेडियां, लोहे की बेडियों से कम कठोर नहीं होगी। चुभन धातु में नहीं वरन् बेडियों में होती है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 313


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ईश्वर इतना निर्दयी व क्रूर नहीं है जो पुरुष-पुरुष और स्त्री-स्त्री के मध्य ऊंच-नीच का भेद करे।

 महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 234


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नारी को अबला कहना अपमानजनक है। यह पुरुषों का नारी के प्रति अन्याय है।

महात्मा, भाग 3 के पृष्ठ 33


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गति जीवन का अंत नहीं हैं। सही अर्थ़ों में मनुष्य अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए जीवित रहता है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 417


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जहां प्रेम है, वही जीवन है। ईर्ष्या-द्वेष विनाश की ओर ले जाते हैं।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, ए तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 417


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यदि अंधकार से प्रकाश उत्पन्न हो सकता है तो द्वेष भी प्रेम में परिवर्तित हो सकता है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 417


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प्रेम और एकाधिकार एक साथ नहीं हो सकता है।

महात्मा, भाग 4 के पृष्ठ 11


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प्रतिज्ञा के बिना जीवन उसी तरह है जैसे लंगर के बिना नाव या रेत पर बना महल।

 महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 264


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यदि आप न्याय के लिए लड रहे हैं, तो ईश्वर सदैव आपके साथ है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 206


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मनुष्य अपनी तुच्छ वाणी से केवल ईश्वर का वर्णन कर सकता है।

ट्रुथ इज गॉड, 1999 पृष्ठ 45


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यदि आपको अपने उद्देश्य और साधन तथा ईश्वर में आस्था है तो सूर्य की तपिश भी शीतलता प्रदान करेगी।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 182


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युद्धबंदी के लिए प्रयत्नरत् इस विश्व में उन राष्ट्रों के लिए कोई स्थान नहीं है जो दूसरे राष्ट्रों का शोषण कर उन पर वर्चस्व स्थापित करने में लगे हैं।

महात्मा, भाग 7 के पृष्ठ 2


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जिम्मेदारी युवाओं को मृदु व संयमी बनाती है ताकि वे अपने दायित्त्वों का निर्वाह करने के लिए तैयार हो सकें।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 371


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विश्व को सदैव मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 33


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बुद्ध ने अपने समस्त भौतिक सुखों का त्याग किया क्योंकि वे संपूर्ण विश्व के साथ यह खुशी बांटना चाहते थे जो मात्र सत्य की खोज में कष्ट भोगने तथा बलिदान देने वालों को ही प्राप्त होती है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 295


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हम धर्म के नाम पर गौ-रक्षा की दुहाई देते हैं किंतु बाल-विधवा के रूप में मौजूद उस मानवीय गाय की सुरक्षा से इंकार कर देते हैं।

 महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 227


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अपने कर्तव्यों को जानने व उनका निर्वाह करने वाली स्त्री ही अपनी गौरवपूर्ण मर्यादा को पहचान सकती है।

माइंड ऑफ महात्मा गांधी, तृतीय प्रकाशन, 1968, पृष्ठ 294


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स्त्री का अंतर्ज्ञान पुरुष के श्रेष्ठ ज्ञानी होने की घमंडपूर्ण धारणा से अधिक यथार्थ है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 51


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जो व्यक्ति अहिंसा में विश्वास करता है और ईश्वर की सत्ता में आस्था रखता है वह कभी भी पराजय स्वीकार नहीं करता।

महात्मा, भाग 5 के पृष्ठ 16


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समुौ जलराशियों का समूह है। प्रत्येक बूंद का अपना अस्तित्व है तथापि वे अनेकता में एकता के द्योतक हैं।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 147


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पीडा द्वारा तर्क मजबूत होता है और पीडा ही व्यक्ति की अंत–दृष्टि खोल देती है।

महात्मा, भाग 2 के पृष्ठ 182


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किसी भी विश्वविद्यालय के लिए वैभवपूर्ण इमारत तथा सोने-चांदी के खजाने की आवश्यकता नहीं होती। इन सबसे अधिक जनमत के बौद्धिक ज्ञान-भंडार की आवश्यकता होती है।

महात्मा, भाग 8 के पृष्ठ 165


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विश्वविद्यालय का स्थान सर्वोच्च है। किसी भी वैभवशाली इमारत का अस्तित्व तभी संभव है जब उसकी नपव ठोस हो।

एविल रोट बाइ द इंग्लिश मीडीयम, 1958 पृष्ठ 27


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मेरे विचारानुसार मैं निरंतर विकास कर रहा हूं। मुझे बदलती परिस्थितियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना आ गया है तथापि मैं भीतर से अपरिवर्तित ही हूं।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 24


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ब्रह्मचर्य क्या है ? यह जीवन का एक ऐसा मार्ग है जो हमें परमेश्वर की ओर अग्रसर करता है।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 24


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प्रत्येक भौतिक आपदा के पीछे एक दैवी उद्देश्य विद्यमान होता है ।

ट्रुथ इज गॉड, 1955 पृष्ठ 24


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सत्याग्रह और चरखे का घनिष्ठ संबंध है तथा इस अवधारणा को जितनी अधिक चुनौतियां दी जा रही हैं इससे मेरा विश्वास और अधिक दृढ होता जा रहा है।